प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है। आपके द्वारा साझा की गई समाचार रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में एल नीनो (El Niño) की स्थिति मजबूत हो रही है और इसका स्तर रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में Niño 3.4 इंडेक्स +2.72°C तक पहुंच गया।

यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड के सबसे ऊंचे साप्ताहिक स्तरों में से एक बताया गया है।


एल नीनो क्या है?

एल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।

यह El Niño-Southern Oscillation (ENSO) नामक व्यापक जलवायु प्रणाली का हिस्सा है।

प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर सकते हैं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान और मौसमी मौसम के पैटर्न में बदलाव ला सकते हैं।


Niño 3.4 इंडेक्स +2.72°C तक पहुंचा

एल नीनो की स्थिति को समझने के लिए Niño 3.4 इंडेक्स एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

समाचार रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

27 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह: +2.72°C

रिपोर्ट में इसकी तुलना 22 नवंबर 2015 को समाप्त सप्ताह में दर्ज +2.76°C से की गई है।

इसका अर्थ है कि वर्तमान Niño 3.4 तापमान ऐतिहासिक रूप से दर्ज किए गए सबसे ऊंचे स्तरों के बेहद करीब है।


क्या प्रशांत महासागर और गर्म हो सकता है?

रिपोर्ट में जिन जलवायु मॉडलों का उल्लेख किया गया है, उनके अनुसार दक्षिणी गोलार्ध के वसंत ऋतु के दौरान, यानी लगभग अक्टूबर और नवंबर, उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में और गर्मी बढ़ सकती है।

कुछ मॉडल संकेत देते हैं कि Niño 3.4 इंडेक्स +3°C से ऊपर जा सकता है।

हालांकि, जलवायु मॉडल पूर्वानुमान होते हैं और वास्तविक परिस्थितियां नए मौसम एवं समुद्री आंकड़ों के आधार पर बदल सकती हैं।


क्या एल नीनो 2027 तक जारी रह सकता है?

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा एल नीनो की स्थिति दक्षिणी गोलार्ध के वसंत के बाद भी जारी रह सकती है।

मॉडल पूर्वानुमानों में दिसंबर से फरवरी के बीच इसके चरम पर पहुंचने की संभावना का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, इसका प्रभाव 2027 की शरद ऋतु तक बने रहने की संभावना भी बताई गई है।

हालांकि, इसकी वास्तविक अवधि और तीव्रता लगातार निगरानी के अधीन रहेगी।


इंडियन ओशन डाइपोल भी मजबूत हो रहा है

प्रशांत महासागर के साथ-साथ Indian Ocean Dipole (IOD) भी इस समय महत्वपूर्ण जलवायु संकेतक है।

रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में IOD इंडेक्स +0.76°C रहा।

यह लगातार तीसरा सप्ताह था जब IOD +0.4°C के सकारात्मक स्तर से ऊपर रहा।

Positive IOD हिंद महासागर क्षेत्र में मौसम और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।


प्रशांत महासागर में वायुमंडलीय बदलाव

एल नीनो की निगरानी केवल समुद्र के तापमान से नहीं की जाती। वायुमंडलीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

रिपोर्ट में पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में ट्रेड विंड्स (व्यापारिक हवाओं) के कमजोर होने या दिशा बदलने जैसे संकेतों का उल्लेख किया गया है।

समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में होने वाले ये बदलाव एल नीनो की स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी ऊंचा

रिपोर्ट में वैश्विक समुद्री सतह के तापमान को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।

60°S से 60°N के बीच के क्षेत्रों में समुद्री सतह का तापमान 1900 के बाद किसी भी महीने के लिए सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

इसके अलावा, 1961–1990 के औसत की तुलना में तापमान 1.04°C अधिक बताया गया है।

यह व्यापक समुद्री गर्मी मौजूदा एल नीनो परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि प्रदान करती है।


ऑस्ट्रेलिया के आसपास भी समुद्र गर्म

रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी, दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों के आसपास समुद्री सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा।

कुछ क्षेत्रों में समुद्र का तापमान सामान्य से 3°C तक अधिक बताया गया है।

समुद्री तापमान में इस तरह के बदलाव समुद्री पारिस्थितिकी और क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों से जुड़े हो सकते हैं।


मजबूत एल नीनो का क्या प्रभाव हो सकता है?

एल नीनो का प्रभाव दुनिया के हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। इसका असर स्थान, मौसम और अन्य जलवायु परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

संभावित रूप से जिन क्षेत्रों पर नजर रखी जाती है उनमें शामिल हैं:

  • 🌧️ वर्षा के पैटर्न
  • 🌡️ तापमान में बदलाव
  • 🌾 कृषि परिस्थितियां
  • 🌊 समुद्री पारिस्थितिकी
  • 🐟 मत्स्य क्षेत्र
  • 💧 जल उपलब्धता
  • 🌍 क्षेत्रीय मौसम पैटर्न

किसी विशेष क्षेत्र के मौसम का अनुमान केवल एल नीनो के आधार पर लगाना उचित नहीं है। अन्य जलवायु संकेतकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।


एल नीनो और Indian Ocean Dipole क्यों महत्वपूर्ण हैं?

जब एल नीनो और Positive IOD एक ही अवधि में सक्रिय होते हैं, तो विभिन्न क्षेत्रों के वर्षा और मौसम पैटर्न पर संभावित प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक इन दोनों संकेतकों की बारीकी से निगरानी करते हैं।

भारत जैसे देशों के लिए प्रशांत महासागर और हिंद महासागर दोनों क्षेत्रों में हो रहे बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

हालांकि, किसी विशेष शहर या क्षेत्र में मौसम कैसा रहेगा, यह केवल इन दो जलवायु संकेतकों से निर्धारित नहीं किया जा सकता।


आने वाले महीनों में किन संकेतकों पर नजर रहेगी?

1. Niño 3.4 तापमान

यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि प्रशांत महासागर का तापमान और कितना बढ़ता है।

2. ट्रेड विंड्स

प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाओं में बदलाव एल नीनो की स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं।

3. Indian Ocean Dipole

Positive IOD की तीव्रता और अवधि भी महत्वपूर्ण रहेगी।

4. वैश्विक समुद्री तापमान

दुनिया के महासागरों के तापमान में होने वाले बदलाव व्यापक जलवायु परिस्थितियों को समझने में मदद करेंगे।

5. मौसमी मौसम पूर्वानुमान

नए आंकड़ों के आधार पर जारी होने वाले मौसमी पूर्वानुमान अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अधिक विशिष्ट जानकारी प्रदान कर सकते हैं।


निष्कर्ष

आपके द्वारा साझा की गई समाचार रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में एल नीनो काफी मजबूत स्थिति में है, और Niño 3.4 इंडेक्स +2.72°C तक पहुंच चुका है।

इसके साथ Positive Indian Ocean Dipole की स्थिति भी देखी जा रही है, जबकि वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी बहुत ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर के तापमान, ट्रेड विंड्स, Indian Ocean Dipole और मौसमी मौसम पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

नए समुद्री और वायुमंडलीय आंकड़ों के आधार पर एल नीनो की तीव्रता और अवधि के बारे में अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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