तमिलनाडु में 2026 उत्तर-पूर्वी मानसून कैसा रहेगा?
तमिलनाडु में 2026 का उत्तर-पूर्वी मानसून सामान्य रहने की संभावना है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य में मानसून के दौरान लगभग 468 मिमी बारिश हो सकती है।
राज्य की दीर्घकालिक औसत (LPA) बारिश लगभग 464 मिमी है। ऐसे में अनुमानित बारिश सामान्य औसत से थोड़ी अधिक रहने की संभावना है।
तमिलनाडु में कितनी बारिश का अनुमान?
2026 के उत्तर-पूर्वी मानसून को लेकर प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- अनुमानित बारिश: 468 मिमी
- दीर्घकालिक औसत: 464 मिमी
- अनुमान: सामान्य बारिश
- पूर्वानुमान की संभावना: 60 प्रतिशत
यह पूर्वानुमान Southern Oscillation Index (SOI) और प्रशांत तथा हिंद महासागर के समुद्री सतह के तापमान (SST) जैसे मौसम संबंधी संकेतकों के आधार पर तैयार किया गया है।
चेन्नई में 730 मिमी बारिश का अनुमान
चेन्नई के लिए भी मानसून पूर्वानुमान महत्वपूर्ण है। शहर में उत्तर-पूर्वी मानसून की सामान्य बारिश लगभग 751 मिमी मानी जाती है।
2026 में चेन्नई में लगभग 730 मिमी बारिश होने का अनुमान है। यह सामान्य औसत की तुलना में करीब 3 प्रतिशत कम है।
इसका मतलब यह है कि पूरे तमिलनाडु में कुल बारिश सामान्य रह सकती है, लेकिन अलग-अलग जिलों में बारिश की मात्रा में अंतर देखने को मिल सकता है।
एल नीनो का मानसून पर असर
TNAU ने यह भी चेतावनी दी है कि मौजूदा एल नीनो (El Niño) परिस्थितियां मानसून के परिसंचरण और बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके कारण:
- तटीय जिलों में कुछ समय के दौरान भारी बारिश हो सकती है।
- चक्रवाती प्रणालियों के कारण तेज बारिश के दौर आ सकते हैं।
- आंतरिक जिलों में अपेक्षाकृत लंबे शुष्क दौर देखने को मिल सकते हैं।
- दिसंबर में जिलों के बीच बारिश में अधिक अंतर हो सकता है।
इसलिए पूरे राज्य की औसत बारिश के साथ-साथ जिला स्तर पर बारिश के वितरण पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून में 13% बारिश की कमी
उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले तमिलनाडु में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 254 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
इस अवधि की सामान्य बारिश करीब 292 मिमी है। 22 सितंबर तक राज्य में लगभग 13 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
ऐसे में उत्तर-पूर्वी मानसून से होने वाली बारिश मिट्टी की नमी, भूजल पुनर्भरण और जलाशयों में पानी के भंडारण के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
किसानों के लिए उत्तर-पूर्वी मानसून क्यों महत्वपूर्ण है?
तमिलनाडु की कृषि और जल संसाधनों के लिए उत्तर-पूर्वी मानसून का विशेष महत्व है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच होने वाली बारिश खेती, सिंचाई और जल संचयन को प्रभावित करती है।
पर्याप्त बारिश से:
- मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है
- भूजल स्तर में सुधार हो सकता है
- जलाशयों में पानी का भंडारण बढ़ सकता है
- सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकता है
- कृषि गतिविधियों को सहायता मिल सकती है
किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देने की सलाह
TNAU ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान और कृषि मौसम सलाह का उपयोग करने की सलाह दी है। इससे किसान बुवाई, सिंचाई और उर्वरक के इस्तेमाल जैसे फैसले बेहतर तरीके से ले सकते हैं।
भारी बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी को खेतों में बनाए गए जल-संग्रहण तालाबों में सुरक्षित रखना भी बाद के सूखे दौर में उपयोगी हो सकता है।
जिला स्तर पर बारिश का वितरण रहेगा महत्वपूर्ण
तमिलनाडु के लिए 468 मिमी की मौसमी बारिश का अनुमान राज्य का औसत है। इसका यह अर्थ नहीं है कि हर जिले में समान मात्रा में बारिश होगी।
बारिश की मात्रा, समय और क्षेत्रीय वितरण कृषि तथा जलाशय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इसलिए किसानों और जल प्रबंधन से जुड़े विभागों के लिए नियमित मौसम अपडेट और जिला-स्तरीय पूर्वानुमान उपयोगी रहेंगे।
निष्कर्ष
तमिलनाडु उत्तर-पूर्वी मानसून 2026 को लेकर TNAU का पूर्वानुमान राज्य के लिए सामान्य बारिश की ओर संकेत करता है। राज्य में करीब 468 मिमी बारिश होने का अनुमान है, जबकि दीर्घकालिक औसत 464 मिमी है।
चेन्नई में लगभग 730 मिमी बारिश का अनुमान है, जो 751 मिमी के सामान्य स्तर से करीब 3 प्रतिशत कम है।
हालांकि, एल नीनो की स्थिति और जिलों के बीच बारिश के वितरण में संभावित अंतर को देखते हुए मौसम की नियमित जानकारी पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
